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EPCG योजना: भारतीय निर्यातकों के लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका

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Damini Pandey

Export Consultant

Table of Content

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  1. अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग
  2. EPCG योजना क्या है?
  3. EPCG लाइसेंस पात्रता: कौन उठा सकता है लाभ?
  4. कस्टम्स में EPCG लाइसेंस पंजीकरण प्रक्रिया
  5. EPCG के अंतर्गत कौन-कौन सी पूंजीगत वस्तुएँ अनुमत हैं?
  6. क्या पूंजीगत वस्तुएँ भारत से भी खरीदी जा सकती हैं?
  7. EPCG प्राधिकरण प्राप्त करने की प्रक्रिया
    1. चरण 1: आवश्यक पूर्व शर्तें
    2. चरण 2: आवश्यक दस्तावेज़ तैयार करें
    3. चरण 3: DGFT पोर्टल पर आवेदन
    4. चरण 4: आवेदन शुल्क जमा करें
    5. चरण 5: DGFT द्वारा समीक्षा
    6. चरण 6: EPCG प्राधिकरण जारी
  8. EPCG निर्यात दायित्व (EO)
  9. निर्यात दायित्व के प्रकार
    1. औसत निर्यात दायित्व (Average EO)
    2. विशिष्ट निर्यात दायित्व (Specific EO)
  10. Average EO से छूट प्राप्त क्षेत्र
  11. क्या Third-Party Exports EO में शामिल हो सकते हैं?
  12. ग्रीन टेक्नोलॉजी उत्पादों के लिए विशेष लाभ
  13. सामान्य चुनौतियाँ और समाधान
    1. स्थापना में देरी
    2. गलत Nexus Certificate
    3. Export Obligation को लेकर भ्रम
    4. विदेश व्यापार नीति में बदलाव
  14. अन्य योजनाओं की तुलना में EPCG क्यों चुनें?
  15. निष्कर्ष
  16. EPCG योजना से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

अंतर्राष्ट्रीय शिपिंग

यदि आप भारत में एक निर्यातक हैं और आयातित मशीनरी पर अधिक खर्च किए बिना अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाना चाहते हैं, तो EPCG योजना आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है। EPCG का पूरा नाम एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स स्कीम (Export Promotion Capital Goods Scheme) है। यह भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जो आपको शून्य सीमा शुल्क (Zero Customs Duty) पर पूंजीगत वस्तुओं (Capital Goods) का आयात करने की अनुमति देती है, जिससे आपके विनिर्माण ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण आसान हो जाता है।

हालाँकि, इस योजना का लाभ लेने के लिए आपको कुछ निर्यात दायित्व (Export Obligation – EO) पूरे करने होते हैं। आपको एक निश्चित अवधि के भीतर निर्धारित मूल्य के सामान या सेवाओं का निर्यात करना होता है, ताकि सरकार यह सुनिश्चित कर सके कि दी गई रियायतें वास्तव में भारत के निर्यात को बढ़ावा दे रही हैं।

इस ब्लॉग में हम EPCG योजना से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियों को विस्तार से समझेंगे, जैसे EPCG लाइसेंस पात्रता, निर्यात दायित्व, पात्र पूंजीगत वस्तुएँ और आवेदन प्रक्रिया। चाहे आप छोटे निर्माता हों या अनुभवी निर्यातक, यह गाइड EPCG योजना को सरल भाषा में समझने में आपकी मदद करेगी।

EPCG योजना क्या है?

एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (EPCG) योजना भारत की विदेश व्यापार नीति (Foreign Trade Policy) के अंतर्गत एक प्रमुख योजना है, जिसके तहत निर्यातकों को शून्य सीमा शुल्क पर पूंजीगत वस्तुओं के आयात की अनुमति दी जाती है, बशर्ते वे निर्धारित निर्यात दायित्वों को पूरा करें।

इन पूंजीगत वस्तुओं का उपयोग निम्नलिखित गतिविधियों में किया जा सकता है:

  • उत्पादन-पूर्व गतिविधियाँ (Pre-Production)
  • उत्पादन गतिविधियाँ (Production)
  • उत्पादन के बाद की गतिविधियाँ (Post-Production)

यह योजना उन व्यवसायों के लिए विशेष रूप से लाभदायक है जो अपनी तकनीक को उन्नत करना या उत्पादन क्षमता बढ़ाना चाहते हैं।

ध्यान देने योग्य बात यह है कि EPCG के तहत आयात पर IGST में छूट 31 मार्च 2022 तक उपलब्ध थी।

EPCG लाइसेंस पात्रता: कौन उठा सकता है लाभ?

यह योजना निम्नलिखित श्रेणियों के निर्यातकों के लिए उपलब्ध है:

  • निर्माता निर्यातक (Manufacturer Exporters)
  • सहायक निर्माताओं के साथ या बिना निर्माता निर्यातक
  • व्यापारी निर्यातक (Merchant Exporters)
  • सेवा प्रदाता (Service Providers)
  • कॉमन सर्विस प्रोवाइडर (CSPs)

नए निर्यातकों को विशेष लाभ मिलता है क्योंकि उन्हें औसत निर्यात दायित्व पूरा नहीं करना पड़ता।

कस्टम्स में EPCG लाइसेंस पंजीकरण प्रक्रिया

DGFT द्वारा EPCG लाइसेंस जारी होने के बाद, निर्यातक को इसे आयात बंदरगाह पर कस्टम्स विभाग में पंजीकृत कराना होता है।

इसके लिए निम्नलिखित दस्तावेज़ जमा करने होते हैं:

  • EPCG लाइसेंस की प्रति
  • बॉन्ड या कानूनी अंडरटेकिंग
  • आवश्यक सहायक दस्तावेज़

सत्यापन के बाद कस्टम्स विभाग लाइसेंस को अपने सिस्टम में दर्ज कर देता है, जिससे आयातक शुल्क और GST छूट का लाभ प्राप्त कर सकता है।

EPCG के अंतर्गत कौन-कौन सी पूंजीगत वस्तुएँ अनुमत हैं?

पूंजीगत वस्तुएँ वे संपत्तियाँ होती हैं जिनका उपयोग वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन में किया जाता है।

EPCG योजना के अंतर्गत निम्नलिखित वस्तुएँ पात्र हैं:

  • मशीनरी, उपकरण और सहायक उपकरण
  • पैकेजिंग मशीनरी
  • रिफ्रैक्ट्री सामग्री
  • रेफ्रिजरेशन उपकरण
  • बिजली उत्पादन उपकरण
  • मशीन टूल्स
  • परीक्षण एवं गुणवत्ता नियंत्रण उपकरण
  • अनुसंधान एवं विकास (R&D) उपकरण
  • प्रदूषण नियंत्रण उपकरण
  • कृषि, मत्स्य पालन और पशुपालन उपकरण
  • कंप्यूटर सॉफ्टवेयर सिस्टम
  • स्पेयर्स, मोल्ड्स, डाइज, जिग्स और फिक्स्चर
  • कैटलिस्ट (Catalysts)

यह व्यापक सूची सुनिश्चित करती है कि लगभग हर उद्योग इस योजना का लाभ उठा सके।

क्या पूंजीगत वस्तुएँ भारत से भी खरीदी जा सकती हैं?

हाँ, EPCG योजना के अंतर्गत भारतीय निर्माताओं से भी पूंजीगत वस्तुएँ खरीदी जा सकती हैं।

इसके लाभ:

  • घरेलू आपूर्तिकर्ताओं के लिए Deemed Export Benefits
  • Specific Export Obligation में 25% की कमी
  • घरेलू खरीद पर GST छूट (31 मार्च 2022 तक)

EPCG प्राधिकरण प्राप्त करने की प्रक्रिया

चरण 1: आवश्यक पूर्व शर्तें

  • IEC (Import Export Code)
  • निर्यात दायित्व की जानकारी

चरण 2: आवश्यक दस्तावेज़ तैयार करें

  • IEC
  • डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC)
  • परियोजना रिपोर्ट
  • सप्लायर का प्रोफार्मा इनवॉइस
  • ट्रेजरी रसीद चालान
  • MSME प्रमाणपत्र / IEM / LOI / IL
  • चार्टर्ड इंजीनियर प्रमाणपत्र (Appendix 5A)
  • CA/Cost Accountant/Company Secretary प्रमाणपत्र (Appendix 5B)

चरण 3: DGFT पोर्टल पर आवेदन

DGFT पोर्टल पर लॉगिन कर Form ANF 5A के माध्यम से आवेदन जमा करें।

चरण 4: आवेदन शुल्क जमा करें

शुल्क पूंजीगत वस्तुओं के मूल्य के अनुसार निर्धारित होता है।

चरण 5: DGFT द्वारा समीक्षा

DGFT का क्षेत्रीय कार्यालय आवेदन की समीक्षा करेगा और आवश्यकता होने पर अतिरिक्त जानकारी माँग सकता है।

चरण 6: EPCG प्राधिकरण जारी

स्वीकृति मिलने के बाद आपको EPCG Authorization जारी कर दिया जाएगा।

नोट: यदि आवेदन पूर्ण है, तो DGFT आमतौर पर 3 कार्य दिवसों के भीतर लाइसेंस जारी कर देता है।

EPCG निर्यात दायित्व (EO)

EPCG योजना के तहत:

  • बचाए गए सीमा शुल्क के 6 गुना मूल्य का निर्यात करना होगा।
  • यह दायित्व 6 वर्षों के भीतर पूरा करना होगा।
  • कुछ क्षेत्रों में निर्यात दायित्व कम निर्धारित किया गया है।
  • विदेशी मुद्रा अर्जित करके भी EO पूरा किया जा सकता है।
  • EO पूरा न करने पर ब्याज सहित शुल्क वापस जमा करना पड़ सकता है।

निर्यात दायित्व के प्रकार

औसत निर्यात दायित्व (Average EO)

पिछले निर्यात प्रदर्शन के आधार पर निर्धारित किया जाता है।

विशिष्ट निर्यात दायित्व (Specific EO)

बचाए गए सीमा शुल्क के छह गुना के बराबर होता है।

Average EO से छूट प्राप्त क्षेत्र

  • हस्तशिल्प
  • हथकरघा
  • कुटीर उद्योग
  • कृषि
  • मत्स्य पालन
  • पुष्पोत्पादन
  • बागवानी
  • पोल्ट्री
  • पशुपालन
  • कालीन उद्योग
  • जूट
  • कॉयर
  • रेशम उद्योग
  • अंगूर उत्पादन

क्या Third-Party Exports EO में शामिल हो सकते हैं?

हाँ, यदि:

  • शिपिंग दस्तावेज़ों में EPCG प्राधिकरण धारक और सहायक निर्माता दोनों का नाम हो।
  • EPCG Authorization नंबर दर्ज हो।

ग्रीन टेक्नोलॉजी उत्पादों के लिए विशेष लाभ

ग्रीन टेक्नोलॉजी उत्पादों के लिए निर्यात दायित्व केवल 75% निर्धारित किया गया है।

इनमें शामिल हैं:

  • सौर ऊर्जा उपकरण
  • पवन ऊर्जा उपकरण
  • बायोमास गैसीफायर
  • वेस्ट हीट बॉयलर
  • जल शोधन संयंत्र
  • इलेक्ट्रिक वाहन (EVs)
  • सोलर सेल्स
  • वेपर एब्जॉर्प्शन चिलर्स

सामान्य चुनौतियाँ और समाधान

स्थापना में देरी

समय पर स्थापना करें या समय रहते विस्तार का अनुरोध करें।

गलत Nexus Certificate

हमेशा प्रमाणित चार्टर्ड इंजीनियर या CA से Nexus Certificate प्राप्त करें।

Export Obligation को लेकर भ्रम

Average EO और Specific EO का स्पष्ट रिकॉर्ड बनाए रखें।

विदेश व्यापार नीति में बदलाव

FTP और DGFT के नवीनतम अपडेट पर नियमित नज़र रखें।

🚀 EPCG योजना के नवीनतम अपडेट
EPCG योजना को अधिक डिजिटल, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने के लिए कई सुधार लागू किए गए हैं।
💻 पूर्ण ऑनलाइन प्रक्रिया EPCG आवेदन और अनुमोदन प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल कर दी गई है।
🏭 MSME फोकस MSMEs के लिए प्रक्रियाओं को सरल और तेज़ बनाया जा रहा है।
📜 FTP 2023 EPCG योजना को Foreign Trade Policy (FTP) 2023 के तहत जारी रखा गया है।
✅ EODC / Redemption EODC और Redemption प्रक्रिया अब ऑनलाइन उपलब्ध है।
🔐 QR आधारित ई-साइन QR Code आधारित e-Sign प्राधिकरण लागू किए गए हैं।
🔗 सिस्टम इंटीग्रेशन ICEGATE और GSTN के साथ बेहतर डेटा इंटीग्रेशन किया गया है।
🛡️ जोखिम आधारित जाँच अनुपालन को मजबूत करने के लिए Risk-Based Verification System लागू किया गया है।
💡 मुख्य निष्कर्ष: EPCG योजना अब अधिक डिजिटल, तेज़ और पारदर्शी हो चुकी है, जिससे निर्यातकों के लिए अनुपालन और लाभ प्राप्त करना पहले से आसान हो गया है।

अन्य योजनाओं की तुलना में EPCG क्यों चुनें?

  • पूंजीगत वस्तुओं पर शून्य सीमा शुल्क
  • उत्पादन क्षमता और उत्पादकता में वृद्धि
  • निर्माता और सेवा प्रदाता दोनों के लिए उपलब्ध
  • अन्य निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं के साथ उपयोग योग्य
  • दीर्घकालिक लागत बचत

निष्कर्ष

EPCG योजना भारतीय निर्यातकों के लिए एक शक्तिशाली प्रोत्साहन योजना है, जो पूंजीगत लागत को कम करके वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद करती है।

चाहे आप निर्माता हों, सेवा प्रदाता हों या व्यापारी निर्यातक, यह योजना आपको आधुनिक तकनीक अपनाने, उत्पादन बढ़ाने और निर्यात विस्तार करने का अवसर प्रदान करती है।

यदि आप EPCG योजना के लिए आवेदन करने की योजना बना रहे हैं, तो सभी आवश्यक दस्तावेज़ पहले से तैयार रखें, समय-सीमाओं का पालन करें और अपने निर्यात दायित्वों की नियमित निगरानी करें। विशेष रूप से नए निर्यातकों और ग्रीन टेक्नोलॉजी क्षेत्र के निर्यातकों के लिए यह योजना और भी अधिक लाभदायक साबित हो सकती है।

EPCG योजना से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

EPCG योजना क्या है?

EPCG (Export Promotion Capital Goods Scheme) भारतीय निर्यातकों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने और निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए शून्य सीमा शुल्क (Zero Customs Duty) पर पूंजीगत वस्तुओं के आयात की अनुमति देती है। इस योजना के तहत आयात पर IGST में भी 31 मार्च 2022 तक छूट प्रदान की गई थी।

EPCG का पूरा नाम क्या है?

EPCG का पूरा नाम Export Promotion Capital Goods Scheme (एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स स्कीम) है।

EPCG योजना के लिए कौन आवेदन कर सकता है?

यह योजना निम्नलिखित के लिए उपलब्ध है:
निर्माता निर्यातक (Manufacturer Exporters), सहायक निर्माता के साथ या बिना
व्यापारी निर्यातक (Merchant Exporters), सहायक निर्माता के साथ
सेवा प्रदाता (Service Providers), जिनमें कॉमन सर्विस प्रोवाइडर्स (CSPs) भी शामिल हैं

क्या EPCG योजना के तहत GST छूट उपलब्ध है?

हाँ। EPCG योजना के तहत पात्र आयातों पर GST छूट उपलब्ध हो सकती है, बशर्ते योजना की सभी शर्तों का पालन किया जाए।

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